ग़ज़ल
मेरे हिस्से यूँ ज़िंदगी आई!!
ज्यूँ अलालत कोई चली आई!!
वक़्त कटता है अस्पतालों में
साँसें गिनने की अब घड़ी आई!!
चारागर! तेरा हौसला देना
यानी शामत ख़लीते की आई!!
हाये! अहबाब भी गये-आये
हाये! उम्मीद भी गई-आई!!
शुक्रिया दोस्त! उन दुआओं का
जिनसे छनकर ग़ज़ल मेरी आई!!
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