गणपति
जीवन में करना सदा,
दिन-प्रतिदिन सन्तोष।
गणपति बप्पा आप ही,
हरिए मेरे दोष।।
शारदे
माँ निशिदिन विनती करूँ,
बहुत कमाऊँ नाम।
मार्ग सुगम होते रहें,
बनते जाए काम।।
गुरु
परम पूज्य गुरुदेव जी,
वन्दन बारम्बार।
नित्य आपकी भक्ति की,
महिमा अपरम्पार।।
सूरज
सूरज उजियारा करे,
गया सवेरे जाग।
गर्म दुपहरी में सदा,
जैसे उगले आग।।
सत्य
सत्य कहो मितवा! सदा,
मन में दृढ़ लो ठान।
दुश्मन होंगे सामने,
हृद में रख अवदान।।
आशा
आशा रखिये राम से,
वे हैं तारणहार।
पूरी करते कामना,
उससे बेड़ा पार।।
उमंग
साहस और उमंग से,
बढ़ता रहे समाज।
पुलकित होना नेह से,
करना उत्तम काज।।
नीलम पेडी़वाल "विहांगी"
रविवार, 7 दिसंबर 2025
दोहा || नीलम पेडी़वाल "विहांगी"
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