अखिल भारतीय साहित्य परिषद् जमशेदपुर महानगर
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मंगलवार, 6 जनवरी 2026
बुधवार, 31 दिसंबर 2025
स्वागत है नव वर्ष का || डॉ. अनिता निधि
स्वागत है नव वर्ष का
स्वागत है नव वर्ष का, द्वार खड़ा है आज।
नये संकल्प ले चलें, सुधरे सारे काज।।
नया साल है आ रहा, छाया है मधुमास।
मिटे सभी दुख जो हृदय, मुखरित है उल्लास।।
मधुर व्यवहार सब रखें, जगत सदा सम्मान।
अतिथि हमारे देव हैं, ये अपनी पहचान।।
नवल गीत नव छंद से, बने हमारे राग।
रख कर मन में हौसला,अपनी किस्मत जाग।।
मधुर व्यवहार कीजिए, मिलता सब जग मान।
दिल को मिलती है खुशी, कर्म भाव संज्ञान ।।
© डॉ. अनिता निधि
    जमशेदपुर , झारखंडजाने और आने वाला साल || पूनम सिंह
जाने और आने वाला साल
ऐ जाने वाले साल किसी को गम तो
किसी को खुशी दे गया तू
किसी के घर मातम तो
किसी के घर हंसी दे गया तू
कहीं सुख के आंसू तो
कहीं दुख के आंसू दे गया तू
क्या शिकायत करूं तुझसे
कुछ लेकर, कुछ दे गया तू
गुजरते हुए साल ने
बहुत कुछ सिखाया
भरम को तोड़, अपने पराए
का बोध कराया
आने वाले साल में
जो हम चाहे वह ले आना तू
हम सबकी जिंदगी को
अच्छी तरह सँवारना तू
कुछ सपने रह गए अधूरे
कुछ ख्वाहिशें रह गई अधूरी
यही इच्छा नव वर्ष में
हो जाए वह सब पूरी
हौसले को हिम्मत देकर
साथ मेरा निभाना तू
श्रम को कामयाबी के
शिखर तक पहुंचाना तू
हो नववर्ष मुबारक आप सबको
जश्न माहौल बनाना तू
रोज नूतन विहान बनकर
सबको गले लगाना तू
© पूनम सिंह
    जमशेदपुर , झारखंडविधा- दोहा छंद || नीलम पेड़ीवाल "विहांगी"
विधा- दोहा छंद
नूतन वत्सर के लिए,हर्षित यह संसार।
अभिनंदन सब कीजिए, लाया हर्ष अपार।।
जीवन में आगे बढ़ें, बुरे समय को भूल।
सबका सम अधिकार हो, खिलें अमन के फूल।।
अगवानी सब कीजिए, प्रतिपल हो वरदान।
नए वर्ष में आपका, बढे़ं मान- सम्मान।।
सपने पूरे हों सभी, नए वर्ष में मीत।
मन के आँगन में छिड़े, नित्य नवल संगीत।।
विनती प्रभु से नित करूँ, रहें सभी नीरोग।
आगे ही बढ़ते रहें,भारत भू के लोग।।
© नीलम पेड़ीवाल "विहांगी"
    जमशेदपुर , झारखंडदोहे || सर्वानन्द सिंह "पथिक"
दोहे
दो हजार पच्चीस को, कहें अलविदा आप।
स्वागत शुभ छब्बीस का, हर्षित करें मिलाप।।
माह दिसंबर बीतता, बढ़ता शीत प्रभाव।
नए वर्ष का आगमन, हर्षित जले अलाव।।
दिखा रहा शीशा हमें, आज दिसंबर माह।
आने वाले वर्ष में, पूरी कर लो चाह।।
नया साल है आ रहा, करने धूम धमाल।
सुख दुख की यादें लिए, बीत रहा यह साल।।
जो बिछड़े इस वर्ष वे, दुर्लभ थे प्रत्येक।
नया साल देगा हमें, अवसर हर्ष अनेक।।
मंगल हो सबके लिए, विकसित हो यह देश।
सबके घर परिवार में, खुशियों का परिवेश।।
© सर्वानन्द सिंह "पथिक"
    जमशेदपुर , झारखंडसोमवार, 22 दिसंबर 2025
घी रोटी ! सूरज सिंह राजपूत
घी रोटी !
मां, मेरे हिस्से की क्या हुई ?क्या वह सच में बहुत अच्छी होती है ?
स्कूल में,
हर दिन कोई ना कोई लाता है
घी रोटी !
मैं ,
मां मैं कभी क्यों नहीं ले जाता ?
तुम तो हमेशा कहती हो …. कल ले जाना !
कल , कल
ये कल कब आएगा ?
अब तो,
मां अब तो सब मुझे चिड़ते हैं … प्याज रोटी !
मां,
पापा कब लायेंगे ?
धी रोटी !
वो कहां गए ?
कब आयेंगे ?
कब लायेंगे ?
धी रोटी !
मुझे याद है
पापा लाए थे
बहोत पहले
अंडे की सब्जी और घी रोटी,
पापा अपने हाथों से खिलाए थे !
अब इतने दिनों से नहीं आए,
सब लोग बुरे हैं
उनके शरीर घी मल दिया
और न जानें कहां ले गाए ?
पापा को कंधे पर झूला झुलाते
मां,
क्या पापा घी लेकर गए हैं लाने की रोटी ?
सब लोग खाए थे तब हमारे घर
पूरी पकवान और दही भी !
अब कोई नहीं आता हमारे घर,
मां, तब मैं तीसरी कक्षा मे था ।
मां तु, तू न रो,
मुझे नहीं चहिए
धी रोटी!
अब मैं पांचवी कक्षा में हूं !
जब बड़ा हो जाऊंगा ,
मैं लेकर आऊंगा ।
पापा को भी बुलाना,
हम साथ खाएंगे,
धी रोटी!
© सूरज सिंह राजपूत
    जमशेदपुर , झारखंड-
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